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भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र 27 अक्टूबर से
सर्द माहौल में पक्ष-विपक्ष ने चढ़ाई बाहें

अविकल थपलियाल
भराड़ीसैंण/गैरसैंण। प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण की सर्द हवा में विधानसभा सत्र की गर्मी घुलने लगी है। सोमवार की चटख धूप में विधानसभा सत्र की तैयारी के लिए मंत्रियों,विधायकों और अधिकारियों के हूटर बजाते काफिले भराड़ीसैंण की शान्त वादियों की तंद्रा को बार बार भंग करते रहे। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
बीते सालों में गैरसैंण इलाके की जनता इस माहौल की आदी हो चुकी है कि साल में एक-दो बार देहरादून से उठकर आयी सरकार कुछ रातें इन बर्फीली हवाओं के बीच गुजारेगी। और फिर कुछ दिन बाजार गुलजार रहेंगे। आर्थिकी को कुछ तो सहारा मिलेगा।
इस बार 27 अक्टूबर से एक और विधानसभा सत्र चलेगा। महज दो दिन का। पूरी सरकार देहरादून से उठकर भराड़ीसैंण पहुंच रही है। देर रात तक वीआईपी वाहनों की आमद रफ्त चलती रही। इंतजाम में सरकारी अमला जुटा रहा।
गौचर,कर्णप्रयाग, गैरसैंण, आदि बद्री समेत अन्य आस पास के इलाकों के सभी रेस्ट हाउस व होटल फुल।
भराड़ीसैंण के रास्ते में सम्भावित प्रदर्शन के जोर से निपटने के लिए बैरिकेडिंग के लिए वेल्डिंग में कारीगर जुटे रहे। पुलिस का दस्ता दिन भर से मौजूद। प्रदर्शनकारियों को पकड़ने के लिए अतिरिक्त बसें तय स्थल पर पहुंचती रही। कहाँ पर किस जगह प्रदर्शनकारी पहुंचेगे। कैसे रोका जाए। इस मुद्दे पर भराड़ीसैंण में देर रात तक पुलिस व खुफिया विभाग के आलाधिकारी बैठकों में मशगूल रहे।

सत्ता व विपक्ष भी विधानमंडल दल की बैठकों में अपने अपने एजेंडे को अमलीजामा पहनाने की कवायद के तहत ठोस रणनीति बनाने में जुटे रहे। सरकार विधानसभा सत्र में पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट की यादों को सहेजने के अलावा अनुपूरक बजट को पास कराएगी।
जबकि, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस विधानसभा के अंदर और बाहर ज्वलन्त मुद्दों को उठा कर सरकार के लिए मुसीबत खड़ा करेगा। चुनावी साल में कांग्रेस की न्याय यात्रा भी भराड़ीसैंण आकर विरोध को नया आयाम देगी।
उक्रांद समेत अन्य संगठन भी कई मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ बिगुल फूंकेंगे।
चूंकि, सत्र महज दो दिन के लिए आहूत किया गया है। लिहाजा,जनता की झोली में सीएम दीवाली पूर्व कौन कौन से गिफ्ट डालेंगे, यह देखना भी अहम रहेगा।
इस दो दिनी सत्र में एक बार फिर भारी भरकम सरकारी धनराशि का बेतहाशा बिल बढ़ेगा। 27 व 28 अक्टूबर के सत्र के बाद सरकार के तमाम अलम्बरदार 29 अक्टूबर के करवा चौथ के लिए अपनी अपनी दहलीज में पहुंच जाएंगे।और फिर यह पर्वतीय इलाका फिर से अपने ढर्रे पर आ जायेगा।

बहरहाल, विशुद्ध पहाड़ी भराड़ीसैंण की गहराती सर्द रात में राजनीतिक दलों की रणनीति की गर्मी घुलती जा रही है। बन्द कमरों में एक दूसरे की धार को कमजोर करने के गेम को फाइनल टच दिया जा रहा है। वीआईपी वाहनों की वीआईपी रफ्तार साल भर वीरान रहने वाली ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण के सन्नाटे को तोड़ तो खूब रही है। लेकिन दो दिन गुलजार रहने के बाद गैरसैंण क्षेत्र फिर से अंधेरी रातों के साये में डूब जाएगा… एक बार फिर सभी कहेंगे चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात…
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