देहरादून, 3 अगस्त। उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत एवं प्रभावित अस्थायी शिक्षकों ने समायोजन, सेवा सुरक्षा, वेतन वृद्धि और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से उनके यमुना कॉलोनी स्थित आवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वर्षों से लंबित मांगों पर अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को समयबद्ध और ठोस निर्णय लेना होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री से मिले प्रतिनिधिमंडल ने कहा— अब आश्वासन नहीं, चाहिए ठोस निर्णय
शिक्षक प्रतिनिधियों ने मंत्री के समक्ष बताया कि पिछले लगभग दो वर्षों से प्रभावित अस्थायी शिक्षक न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस दौरान कई बार ज्ञापन सौंपे गए, बैठकों का आयोजन हुआ और आश्वासन भी मिले, लेकिन आज तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। वहीं कार्यरत अस्थायी शिक्षक बेहद कम वेतन पर अपनी सेवाएं देने को मजबूर हैं। उन्होंने सभी अस्थायी शिक्षकों के लिए न्यायसंगत एवं स्थायी नीति बनाने तथा वेतन वृद्धि की मांग उठाई।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा केवल रोजगार का नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है। यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो अस्थायी शिक्षक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन की आगामी रणनीति बनाने के लिए बाध्य होंगे।

बैठक के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए पत्र पर संज्ञान लेते हुए उच्च शिक्षा निदेशक को पदों एवं रिक्तियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने दूरभाष के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए, ताकि मामले में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
प्रतिनिधिमंडल ने सभी अस्थायी शिक्षकों से अधिक से अधिक संख्या में एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी ताकत संगठन और एकता है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा विभाग के सभी कार्यरत एवं प्रभावित अस्थायी शिक्षकों के सम्मान, अधिकार और सुरक्षित भविष्य का संघर्ष है।
बैठक में डॉ. रोहित, डॉ. मोहित, डॉ. मनोज, डॉ. शैलेश, डॉ. सरन, डॉ. प्रवेश, डॉ. चिंतामणि, डॉ. राकेश, डॉ. ममता, डॉ. जयहरी, डॉ. रणजीत, डॉ. ब्रह्मराज, डॉ. बबलू, डॉ. बिपिन, डॉ. प्रियंका, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. ममता सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।
