काशीपुर तहसील में कमिश्नर का औचक निरीक्षण, कई मामलों में मिली लापरवाही

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काशीपुर, 21 सितंबर। काशीपुर तहसील की कार्यप्रणाली की हकीकत सोमवार को उस समय सामने आई, जब कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत ने तहसील का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित स्वामित्व वादों, धारा 143 के प्रकरणों और विभिन्न राजस्व आवेदनों के निस्तारण में कई खामियां सामने आईं। एक मामले में आवेदन जमा होने से पहले ही रिपोर्ट लगाए जाने पर मंडलायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित कानूनगो से जवाब तलब करने के निर्देश दिए।

पांच साल पुराने वादों से लेकर 143 के मामलों की समीक्षा, आवेदन से पहले रिपोर्ट लगाने पर जवाब तलब

मंडलायुक्त ने तहसील कार्यालय के विभिन्न पटलों, अभिलेखागार और राजस्व अनुभागों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से जनता से जुड़ी सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता के कार्यों में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फरियादियों की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

पांच साल पुराने वादों पर सख्ती

उपजिलाधिकारी न्यायालय में पांच वर्ष से लंबित स्वामित्व वादों की समीक्षा के दौरान पांच मामलों को देखा गया, जिनमें दो मामलों में लापरवाही सामने आई। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। साथ ही पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं करने वाले लेखपाल और पेशकार को एक सप्ताह के भीतर प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश भी दिए।

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मीडिया से बातचीत में मंडलायुक्त ने बताया कि धारा 176, 210 और 229-बी समेत पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित मामलों की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि कई प्रकरण ऐसे मिले, जिनका निस्तारण पहले ही किया जा सकता था, लेकिन बार-बार आदेश होने के बावजूद अंतिम आदेश जारी नहीं किए गए।

जमीन और पारिवारिक बंटवारे के मामलों में भी देरी

जमीन और पारिवारिक बंटवारे से जुड़े मामलों की समीक्षा में भी लापरवाही सामने आई। मंडलायुक्त ने बताया कि कुछ मामलों में कुर्रा तैयार करने के आदेश काफी पहले हो चुके थे, लेकिन संबंधित लेखपाल ने समय पर कुर्रा तैयार नहीं किया। इस मामले में भी जिलाधिकारी को संबंधित कार्मिक का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए गए।

143 के मामलों की समीक्षा

निरीक्षण के दौरान भूमि के गैर-कृषि उपयोग से संबंधित धारा 143 के तहत प्राप्त आवेदनों की भी समीक्षा की गई। मंडलायुक्त ने ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदनों के साथ संबंधित पंजिकाओं का अवलोकन किया। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदार से ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदनों की जानकारी ली।

विभिन्न आवेदनों पर प्राप्ति की तारीख दर्ज नहीं होने पर भी मंडलायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आवेदन की प्राप्ति तिथि दर्ज नहीं होने के कारण यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन सा प्रकरण कितने समय से लंबित है। उन्होंने अधिकारियों को रिकॉर्ड और आवेदन प्राप्ति की व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

18 को आवेदन, 16 को रिपोर्ट

निरीक्षण के दौरान एक मामला सामने आया, जिसमें आवेदन 18 तारीख को जमा हुआ, जबकि उस पर रिपोर्ट 16 तारीख को ही लगा दी गई थी। मंडलायुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी को संबंधित कानूनगो से तत्काल जवाब तलब करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि कानूनगो और अन्य संबंधित कार्मिकों से प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कानूनगो कक्ष में भी मिली खामी

मंडलायुक्त ने कानूनगो कक्ष का भी निरीक्षण किया। यहां कानूनगो द्वारा प्राप्त आवेदनों की प्राप्ति पंजिका नहीं बनाए जाने की बात सामने आई। इस पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी को संबंधित दोनों कानूनगो का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।

इसके अलावा तहसील परिसर में दस बड़े बकायेदारों की सूची प्रदर्शित करने के निर्देश एसडीएम और तहसीलदार को दिए गए।

मंडलायुक्त दीपक रावत ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि तहसील में आने वाले फरियादियों के कार्यों का नियमानुसार और समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी और लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जयकिशन, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र, एसडीएम अभय प्रताप सिंह, सीओ प्रशांत कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।