डॉ.यूनुस चौधरी के स्वागत का सिलसिला जारी,अल्पसंख्यक समाज में बढ़ी सक्रियता;2027 को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज

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जसपुर, 30 सितंबर। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक हुनर परिषद के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद भाजपा नेता डॉ. यूनुस चौधरी के स्वागत और बधाई कार्यक्रमों का सिलसिला लगातार जारी है। जगह-जगह हो रहे स्वागत कार्यक्रमों में अल्पसंख्यक समाज के लोगों की भागीदारी दिखाई दे रही है। नई जिम्मेदारी के साथ समाज के लोगों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं और विभिन्न क्षेत्रों से लोग अपनी समस्याओं को लेकर डॉ. यूनुस चौधरी से संपर्क कर रहे हैं।

मंगलवार शाम जसपुर में जिला व्यापार मंडल के जिला मंत्री नासिर हुसैन, पूर्व सभासद राशिद सिद्दीकी, रियाज अहमद, सलीम अहमद सिद्दीकी सहित अन्य लोगों ने डॉ. यूनुस चौधरी का फूल-मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान व्यापारियों की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा गया।

ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों के हित में सरकार से प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की गई। व्यापार मंडल जिला मंत्री राशिद सिद्दीकी ने जीएसटी भरने वाले व्यापारियों के लिए दुर्घटना मुआवजे की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मांग रखी कि सामान्य मृत्यु की स्थिति में भी पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी व्यापारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

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डॉ. यूनुस चौधरी ने व्यापारियों की मांग को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि वह इस विषय को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष रखेंगे और सरकार के स्तर पर समाधान के लिए प्रयास करेंगे।

अल्पसंख्यक समाज के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

डॉ. यूनुस चौधरी को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद जसपुर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। अल्पसंख्यक समाज के बीच उनके समर्थन और लगातार हो रहे स्वागत कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का दौर शुरू हो गया है।

क्षेत्र में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा डॉ. यूनुस चौधरी को जसपुर विधानसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बनाती है, तो चुनाव में मुकाबला खासा महत्वपूर्ण हो सकता है। उनके समर्थकों और समाज के बीच यह चर्चा भी सुनने को मिल रही है कि डॉ. यूनुस चौधरी को प्रत्याशी बनाए जाने की स्थिति में वे कांग्रेस के सामने मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं और जसपुर की राजनीतिक तस्वीर बदलने की कोशिश कर सकते हैं।

हालांकि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए इन चर्चाओं को फिलहाल क्षेत्र में चल रही राजनीतिक अटकलों और संभावनाओं के रूप में ही देखा जा रहा है। इतना जरूर है कि नई जिम्मेदारी मिलने के बाद डॉ. यूनुस चौधरी की राजनीतिक सक्रियता और उनके स्वागत कार्यक्रमों ने जसपुर की सियासत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

सियासी सफर से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

डॉ. यूनुस चौधरी का राजनीतिक एवं सामाजिक सफर लंबे समय से सक्रिय रहा है। उनके पिता मरहूम हाजी यूसुफ चौधरी एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2004 से 2007 तक गन्ना विकास/चीनी विकास बोर्ड में कैबिनेट मंत्री स्तर की जिम्मेदारी पर रहे थे। डॉ. यूनुस चौधरी स्वयं वर्ष 2005 से 2007 तक मुख्यमंत्री सलाहकार रहे तथा वर्ष 2008 में क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में भी कार्य किया।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थामा और जसपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। चुनाव में उन्हें 10,700 मत प्राप्त हुए। इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और संगठन स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

अब उत्तराखंड सरकार द्वारा उन्हें राज्य अल्पसंख्यक हुनर परिषद का उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके सामने अल्पसंख्यक समाज के हुनर को रोजगार से जोड़ने, युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने और समाज से जुड़े मुद्दों को शासन तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

स्वागत के साथ बढ़ रही उम्मीदें

जसपुर विधानसभा क्षेत्र में जगह-जगह हो रहे स्वागत कार्यक्रमों के बीच अल्पसंख्यक समाज की ओर से यह संदेश भी सामने आ रहा है कि समाज अपने बीच से उठने वाली आवाज को मजबूत देखना चाहता है। ऐसे में डॉ. यूनुस चौधरी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नई जिम्मेदारी को जनहित के कार्यों से जोड़ते हुए समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की होगी।

नई जिम्मेदारी के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता और 2027 को लेकर शुरू हुई चर्चाओं ने जसपुर विधानसभा क्षेत्र की सियासत को भी एक नया मुद्दा दे दिया है। आने वाले समय में डॉ. यूनुस चौधरी की भूमिका, संगठन में उनकी सक्रियता और क्षेत्र में उनकी जनसंपर्क गतिविधियां यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि यह राजनीतिक चर्चा किस दिशा में आगे बढ़ती है।