काशीपुर। महानगर कांग्रेस कमेटी की जिलाध्यक्ष अलका पाल ने उत्तराखंड सरकार पर सरकारी जमीनों के आवंटन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रदेश के जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों और सरकारी जमीन को किसी भी कीमत पर खुर्द-बुर्द नहीं होने देगी।
छरबा की 325 बीघा जमीन के आवंटन पर कांग्रेस ने उठाए सवाल,अलका पाल बोलीं- निवेश के नाम पर सरकारी जमीन को औने-पौने दाम में देने की भूमिका तैयार की गई

अलका पाल ने आरोप लगाया कि इन्वेस्टमेंट मीट के नाम पर प्रदेश की बेशकीमती सरकारी जमीन को बाहरी लोगों और संस्थाओं को कम कीमत पर उपलब्ध कराने की भूमिका तैयार की गई। उन्होंने देहरादून के छरबा क्षेत्र की 325 बीघा जमीन के आवंटन का मामला उठाते हुए सरकार से जमीन की कीमत और आवंटन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष के मुताबिक सिडकुल से लगी छरबा क्षेत्र की करीब 325 बीघा जमीन छोटे उद्यमियों को कारोबार शुरू करने के उद्देश्य से अधिगृहीत की गई थी। उनका आरोप है कि बाद में इस जमीन को छोटे उद्यमियों के बजाय पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी (UPES), बिधौली को आवंटित कर दिया गया।

अलका पाल ने दावा किया कि 325 बीघा जमीन का आवंटन करीब 122.36 करोड़ रुपये में किया गया, जो लगभग 37.65 लाख रुपये प्रति बीघा बैठता है। उन्होंने कहा कि उस समय जमीन का बाजार मूल्य करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति बीघा बताया जा रहा था। कांग्रेस ने इस अंतर को लेकर आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जमीन का हस्तांतरण किया ही जाना था तो पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
सर्किल रेट बढ़ने पर भी उठाए सवाल
अलका पाल ने जमीन के आवंटन के बाद सर्किल रेट में हुए बदलाव को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि 325 बीघा जमीन करीब 122.36 करोड़ रुपये में दिए जाने के लगभग तीन महीने बाद सर्किल रेट संशोधित किया गया और नई दर करीब 75.20 लाख रुपये प्रति बीघा हो गई।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष के अनुसार संशोधित सर्किल रेट के हिसाब से 325 बीघा जमीन की कीमत करीब 244 करोड़ रुपये बैठती है। उन्होंने दावा किया कि दोनों मूल्यों के बीच करीब 122 करोड़ रुपये का अंतर है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जमीन के आवंटन के समय कौन-सी मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई गई थी।
अलका पाल ने सरकार से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने और जमीन आवंटन से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है और उसके इस्तेमाल अथवा हस्तांतरण में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कांग्रेस की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर सरकार अथवा संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
