काशीपुर। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच युवाओं को खेलों से जोड़ने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से अल्लीखां में ‘नशा छोड़ो, जीवन से नाता जोड़ो’ खेल प्रतियोगिता के अंतर्गत क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का शुभारंभ उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक हुनर परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. यूनुस चौधरी ने फीता काटकर किया। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डॉ. चौधरी ने स्वयं बल्ला थामकर मैदान में बल्लेबाजी की और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नशा आज युवा पीढ़ी के भविष्य के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। नशे की आदत किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर उसके माता-पिता, भाई-बहनों और पूरे परिवार को झेलना पड़ता है। एक युवा जब नशे की गिरफ्त में आता है तो उसके सपने, शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी प्रभावित होने लगती हैं। इसलिए जरूरी है कि समय रहते युवाओं को इस बुराई से बचाने के लिए सामाजिक स्तर पर प्रयास किए जाएं।

उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को सही दिशा देने का प्रभावी माध्यम हैं। मैदान में उतरने से शरीर स्वस्थ रहने के साथ मानसिक मजबूती भी मिलती है। खेल अनुशासन, आपसी सहयोग, धैर्य और लक्ष्य हासिल करने का जज्बा सिखाते हैं। युवाओं को अपनी ऊर्जा नशे में बर्बाद करने के बजाय खेल, शिक्षा और सकारात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।


डॉ. चौधरी ने आयोजन समिति की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘नशा छोड़ो, जीवन से नाता जोड़ो’ केवल एक प्रतियोगिता का नाम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का संदेश है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और उनमें खेलों के प्रति रुचि बढ़ती है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर खेलने वाला खिलाड़ी भी अपनी मेहनत और लगन से प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकता है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूरी बनाकर खेलों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और अपने परिवार के साथ-साथ क्षेत्र का नाम रोशन करें।
एक मजबूत सामाजिक संदेश: नशे के खिलाफ अभियान तभी सार्थक होगा, जब परिवार, समाज और युवा मिलकर इसकी रोकथाम के लिए आगे आएंगे। युवाओं के हाथों में नशे का सामान नहीं, बल्कि खेल का बल्ला और भविष्य संवारने का अवसर होना चाहिए।
